वास्तु शास्त्र
प्राचीन भारतीय वास्तुकला विज्ञान
मयमतम्, मानसार, बृहत् संहिता, विश्वकर्मा वास्तु शास्त्र और स्थापत्य वेद पर आधारित सम्पूर्ण मार्गदर्शिका। 100% प्रामाणिक पारंपरिक ज्ञान।
सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र मार्गदर्शिका
पंच महाभूत
आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी — ब्रह्मांड के निर्माण खंड
और जानें →🧭अष्टदिक्
हर दिशा के देवता, ग्रह और ऊर्जा
और जानें →🕉️वास्तु पुरुष
वास्तु पुरुष, 45 देवता, और पवित्र ग्रिड
और जानें →🏠कक्ष मार्गदर्शिका
रसोई, शयनकक्ष, पूजा कक्ष, शौचालय, और अधिक
और जानें →🏢भवन प्रकार
घर, ऑफिस, दुकान, कारखाना — सभी के लिए वास्तु
और जानें →✅क्या करें क्या न करें
17 आवश्यक करें और 20 महत्वपूर्ण न करें
और जानें →💎उपाय
बिना तोड़-फोड़ वास्तु दोष ठीक करें — 10 उपाय प्रकार
और जानें →📐भूखंड आकार
आदर्श, स्वीकार्य, और अशुभ भूखंड आकार
और जानें →🎨रंग व अन्य
दिशा-अनुसार रंग, सीढ़ी, जल स्थापना
और जानें →मूल सिद्धांत
"दक्षिण-पश्चिम सबसे भारी और ऊँचा होना चाहिए; उत्तर-पूर्व सबसे नीचा और खुला होना चाहिए। यह एकमात्र नियम — जब पालन किया जाए — अधिकांश वास्तु दोषों को ठीक करता है।"
— मयमतम् का मूल वास्तु सिद्धांत
प्रामाणिक वैदिक ज्ञान
सम्पूर्ण सामग्री प्रामाणिक वैदिक ग्रंथों से ली गई है: मयमतम्, मानसार, बृहत् संहिता, विश्वकर्मा वास्तु शास्त्र, और डी.एन. शुक्ला की वास्तु शास्त्र खंड I (1961)।
इतिहास और शास्त्रीय ग्रंथ देखें →