आठ दिशाएँ
हर दिशा एक देवता (दिक्पालक), ग्रह और तत्व से शासित है। दिशाओं को समझना वास्तु शास्त्र की नींव है।
| दिशा | अधिष्ठात्र देवता | ग्रह | तत्व |
|---|---|---|---|
| पूर्व | Indra (King of Gods) | सूर्य | प्रकाश |
| पश्चिम | वरुण (जल और ब्रह्मांडीय सागर के देवता) | शनि | जल |
| उत्तर | कुबेर (धन के देवता) | बुध | धन/समृद्धि |
| दक्षिण | यम (मृत्यु और धर्म के देवता) | मंगल | अग्नि/जीवन शक्ति |
| ईशान्य (ईशान कोण) | ईशान (भगवान शिव) | बृहस्पति (गुरु) | जल |
| आग्नेय (अग्नि कोण) | अग्नि (अग्नि देवता) | शुक्र | अग्नि |
| नैऋत्य (नैऋत्य कोण) | निऋति (विनाश की देवी) | राहु (उत्तर चंद्र बिंदु) | पृथ्वी |
| वायव्य (वायु कोण) | वायु (पवन देवता) | चंद्रमा | वायु |
पूर्व
समृद्धि, यश, अधिकार, सामाजिक प्रतिष्ठा
पूर्व दिशा को अधिकतम प्रातःकालीन सूर्यप्रकाश मिलना चाहिए। मुख्य द्वार, बैठक कक्ष और पूजा कक्ष के लिए सर्वोत्तम दिशा। करियर विकास, सामाजिक प्रतिष्ठा और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।
अनुशंसित
- ✓ प्रवेश द्वार
- ✓ खिड़कियाँ
- ✓ खुले स्थान
- ✓ बैठक कक्ष
- ✓ पूजा स्थल
वर्जित
- ✗ शौचालय
- ✗ रसोई
- ✗ सूर्य प्रकाश रोकने वाली भारी संरचनाएँ
पश्चिम
स्थिरता, कड़ी मेहनत से यश, आध्यात्मिक अनुशासन
भोजन कक्ष, बच्चों के शयनकक्ष और अध्ययन कक्ष के लिए अच्छी। पूर्व से ऊँची होनी चाहिए। अस्त होते सूर्य और स्थिरता का प्रतीक।
अनुशंसित
- ✓ भोजन कक्ष
- ✓ बच्चों का कक्ष
- ✓ अध्ययन कक्ष
- ✓ सीढ़ी
वर्जित
- ✗ मुख्य द्वार (जब तक कोई विकल्प न हो)
- ✗ जल स्रोत
उत्तर
धन, करियर विकास, आर्थिक समृद्धि, अवसर
धन की दिशा। खुला, स्वच्छ और अव्यवस्था-मुक्त रखें। प्रवेश द्वार, बैठक कक्ष और कीमती सामान, तिजोरी, नकद पेटी रखने के लिए सर्वोत्तम। ढलान उत्तर की ओर होनी चाहिए।
अनुशंसित
- ✓ मुख्य द्वार
- ✓ बैठक कक्ष
- ✓ तिजोरी/सेफ
- ✓ खुले स्थान
वर्जित
- ✗ शौचालय
- ✗ रसोई
- ✗ भारी भंडारण
- ✗ ऊँची संरचनाएँ
दक्षिण
यश, कानूनी मामले, पूर्वजों से संबंध, शक्ति
उत्तर से भारी, ऊँचा और अधिक ठोस होना चाहिए। पूर्वज पूजन से जुड़ा है। यहाँ मुख्य द्वार रखने से बचें (विशेष समायोजन आवश्यक)।
अनुशंसित
- ✓ भंडारण कक्ष
- ✓ सीढ़ी
- ✓ गैराज
- ✓ भारी संरचनाएँ
वर्जित
- ✗ मुख्य द्वार (सामान्यतः)
- ✗ जल स्रोत
- ✗ बोरवेल
ईशान्य (ईशान कोण)
आध्यात्मिकता, ज्ञान, पवित्रता, दिव्य आशीर्वाद, विद्या
सबसे पवित्र दिशा। सबसे नीचा, स्वच्छ और सबसे खुला क्षेत्र होना चाहिए। पूजा कक्ष, ध्यान, जल स्रोतों के लिए आदर्श। दोषपूर्ण ईशान्य कोण सबसे गंभीर वास्तु दोषों में से एक है।
अनुशंसित
- ✓ पूजा कक्ष
- ✓ ध्यान कक्ष
- ✓ कुआँ/बोरवेल
- ✓ भूमिगत जल टंकी
- ✓ तुलसी का पौधा
वर्जित
- ✗ शौचालय
- ✗ रसोई
- ✗ सेप्टिक टंकी
- ✗ भारी भंडारण
- ✗ सीढ़ी
आग्नेय (अग्नि कोण)
ऊर्जा, उत्साह, पाक कला, रूपांतरण, जीवन शक्ति
अग्नि क्षेत्र। रसोई आदर्श रूप से यहाँ होनी चाहिए। सभी अग्नि-संबंधी और विद्युत उपकरण — जनरेटर, बॉयलर, बिजली पैनल — यहाँ रखें। रसोइया को पूर्व दिशा की ओर मुख करना चाहिए।
अनुशंसित
- ✓ रसोई
- ✓ विद्युत कक्ष
- ✓ जनरेटर
- ✓ बॉयलर
- ✓ अग्निकुंड
वर्जित
- ✗ जल स्रोत
- ✗ बोरवेल
- ✗ शौचालय
- ✗ शयनकक्ष
नैऋत्य (नैऋत्य कोण)
स्थिरता, शक्ति, भारीपन, जमीन से जुड़ाव, रिश्तों में स्थिरता
सबसे भारी, ऊँचा और ठोस भाग होना चाहिए। मुख्य शयनकक्ष यहाँ होना चाहिए। ऊपरी जल टंकी नैऋत्य में। ईशान्य से कभी नीचा या खाली न छोड़ें।
अनुशंसित
- ✓ मुख्य शयनकक्ष
- ✓ भारी भंडारण
- ✓ ऊपरी जल टंकी
- ✓ सीढ़ी
वर्जित
- ✗ जल स्रोत
- ✗ बोरवेल
- ✗ भूमिगत जल टंकी
- ✗ खुले स्थान
वायव्य (वायु कोण)
गति, परिवर्तन, सामाजिक संबंध, अतिथि, संवाद
वायु क्षेत्र। अतिथि शयनकक्ष, तैयार माल का भंडारण, शौचालय और गैराज उपयुक्त हैं। सामाजिक संबंधों का समर्थन करता है लेकिन परिवर्तन से जुड़ा है — मुख्य शयनकक्ष यहाँ न रखें।
अनुशंसित
- ✓ अतिथि शयनकक्ष
- ✓ शौचालय
- ✓ गैराज
- ✓ बैठक कक्ष
वर्जित
- ✗ मुख्य शयनकक्ष
- ✗ पूजा कक्ष
- ✗ मुख्य द्वार
- ✗ जल स्रोत