वास्तु — क्या करें क्या न करें

वास्तु शास्त्र की व्यावहारिक रीढ़ — 17 आवश्यक करें और 20 वर्जित कार्य।

क्या करें

17 आवश्यक नियम

1

उत्तर-पूर्व कोने को स्वच्छ, खुला और संपत्ति के सबसे निचले स्तर पर रखें।

2

दक्षिण-पश्चिम कोने को भारी, ठोस और सबसे ऊँचे स्तर पर रखें।

3

ब्रह्मस्थान (केंद्र) को खंभों, दीवारों या भारी वस्तुओं से मुक्त रखें।

4

सुनिश्चित करें कि ढलान दक्षिण-पश्चिम (ऊँचा) से उत्तर-पूर्व (नीचा) की ओर हो।

5

अधिकतम सकारात्मकता के लिए मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में रखें।

6

पूर्व से अधिकतम सूर्यप्रकाश आने दें — पूर्व दिशा की खिड़कियाँ बड़ी रखें।

7

बगीचे या बालकनी के उत्तर-पूर्व में तुलसी लगाएँ।

8

प्रवेश द्वार पर शुभ चिह्न (ॐ, स्वस्तिक, तोरण, कलश) लगाएँ।

9

घर को अच्छी तरह रोशन रखें, विशेषकर उत्तर-पूर्व कोना।

10

टपकते नलों की तुरंत मरम्मत करें — टपकता पानी धन के क्षय का प्रतीक है।

11

सभी दरवाज़ों और कब्ज़ों को ठीक रखें — चरमराते दरवाज़े नकारात्मकता आमंत्रित करते हैं।

12

सीढ़ियों में विषम संख्या में सीढ़ियाँ रखें (5, 7, 9, 11, 15, 17, 19, 21)।

13

सुनिश्चित करें कि छत का ढलान दक्षिण से उत्तर या पश्चिम से पूर्व की ओर हो।

14

शुभ पौधे लगाएँ: तुलसी, नीम, केला, अशोक, आम, चंदन, चमेली।

15

जल निकासी में पानी का प्रवाह उत्तर या पूर्व की ओर रखें।

16

मुख्य द्वार पर नेमप्लेट लगाएँ — यह अवसर आकर्षित करती है।

17

प्रवेश द्वार के पास विंड चाइम लगाएँ ताकि रुकी हुई ऊर्जा दूर हो।

क्या न करें

20 महत्वपूर्ण नियम

1

उत्तर-पूर्व कोने को शौचालय, भारी संरचनाओं या भंडारण से अवरुद्ध न करें।

2

किसी भी शयनकक्ष में बिस्तर की ओर मुख किए हुए दर्पण न रखें।

3

घर में टूटी घड़ियाँ, दर्पण या दरार वाली वस्तुएँ न रखें।

4

घर के अंदर काँटेदार पौधे (कैक्टस, प्रवेश द्वार के पास बोगेनविलिया) न लगाएँ।

5

मुख्य प्रवेश द्वार पर गहरा/काला रंग न करें।

6

मुख्य प्रवेश द्वार दक्षिण-पश्चिम में न रखें।

7

उत्तर दिशा की ओर सिर करके न सोएँ (चुंबकीय क्षेत्र में व्यवधान)।

8

रसोई में दक्षिण की ओर मुख करके खाना न पकाएँ।

9

रसोई या पूजा कक्ष से सटा हुआ शौचालय न बनाएँ।

10

ब्रह्मस्थान (घर के केंद्र) में शौचालय या रसोई न बनाएँ।

11

प्रवेश द्वार की ओर इशारा करती बंद गली न हो (वीथि शूल / टी-जंक्शन)।

12

दक्षिण-पश्चिम को नीचा या खुला न छोड़ें जबकि उत्तर-पूर्व ऊँचा या अवरुद्ध हो।

13

दक्षिण-पश्चिम में जलाशय या भूमिगत टंकी न रखें।

14

युद्ध, हिंसा, डूबते जहाज या रोती आकृतियों के चित्र न लगाएँ।

15

बिस्तर के नीचे कबाड़ या अप्रयुक्त वस्तुएँ न रखें।

16

एक सीध में तीन दरवाज़े न रखें (ऊर्जा तेज़ी से निकल जाती है)।

17

सीढ़ी के नीचे शौचालय न बनाएँ।

18

मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर का स्थान अंधेरा या गंदा न रखें।

19

शयनकक्ष में मंदिर न रखें (अनिवार्य हो तो पर्दा/विभाजन लगाएँ)।

20

मुख्य द्वार के ठीक सामने जूतों का रैक न रखें।